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हांसी शहर भारत के प्राचीनतम ऐतिहासिक शहरों में एक है। मनुष्य की सभ्यता के प्रारम्भ से लेकर आधुनिक काल तक के प्रमाण यहां मौजूद हैं। कुषाण काल से लेकर राजपूत काल तक हांसी में रहने वालों का जीवनस्तर वैभवपूर्ण व संपन्न था। आप्या व दृषद्वती नदी के संगम पर बसी यह नगरी तत्कालीन धर्मों के अनुयायियों एवं पवित्रता के कारण इतिहास में अहम स्थान रखती है। कुषाण काल में मध्य एशिया के देशों तक यहां से व्यापार होता था। वैदिक काल से लेकर राजपूत काल तक हांसी हिन्दुओं का पवित्र नगर रहा। मुस्लिम काल में भी हांसी इस्लाम के प्रचार एवं प्रसार का केन्द्र बना रहा। सूफी संतों का पवित्र शहर बन जाने के कारण इसे ‘हांसी शरीफ’ कहा गया। एक प्राचीन कथानक के अनुसार हांसी में श्रेष्ठ तलवारें बनाई जाती थी देश-विदेश में अपनी असिः (तलवार) के लिए विख्यात इस स्थान का नाम असिगढ़ था जो काफीस समय तक प्रचलित रहा। यही नाम कालांतर में असिका और फिर हांसी के रूम में जाना गया। भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा हांसी दुर्ग पर किए गए उत्खनन में प्राचीन सभ्यता से अंग्रेजी काल तक के जो प्रमाण खोज निकाले हैं, वे हांसी ही नहीं हरियाणा के लिए गौरव की बात है। आज भी यहां स्थित स्मारक किले के ऊपर बने भवन, बड़सी दरवाजा, मुस्लिम काल की मस्जिदें व दरगाह चार कुतुब आदि पर्यटकों के लिए आकर्षण का केन्द्र हैं।